24-कोच वंदे भारत स्लीपर ट्रेन: ICF प्रोटोटाइप, पैंट्री कार और नए मेंटेनेंस डिपो
हावड़ा–कामाख्या रूट पर पहली 16-कोच की वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू करने के बाद, भारतीय रेलवे अब एक बड़ी 24-कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन लाने की तैयारी कर रहा है। 160 किमी/घंटा की रफ्तार (180 किमी/घंटा टेस्टिंग स्पीड) से चलने के लिए डिज़ाइन की गई यह फुल-लेंथ ओवरनाइट ट्रेन देश के सबसे व्यस्त और लंबी दूरी के रेल मार्गों पर यात्रियों की भारी भीड़ को संभालेगी। इसके ज़रिए रेलवे अपने व्यस्त ट्रैकों की क्षमता का अधिकतम उपयोग कर सकेगा और दिन में चलने वाली लगभग 30% चेयर-कार वंदे भारत ट्रेनों में कम ऑक्यूपेंसी की समस्या का भी समाधान करेगा।
रेल मंत्रालय ने चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) को 24-कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के 50 रैक बनाने की ज़िम्मेदारी सौंपी है। ICF द्वारा इस ट्रेन का अंतिम डिज़ाइन 10 नवंबर 2026 तक फाइनल कर लिया जाएगा और इसका पहला प्रोटोटाइप मई या जून 2027 तक ट्रायल के लिए बाहर आने का लक्ष्य है। इन 50 ट्रेनों के प्रोपल्शन सिस्टम की सप्लाई का काम मेधा सर्वो ड्राइव्स (33 रैक) और एल्सटॉम (17 रैक) के बीच बांटा गया है।
डेडिकेटेड पैंट्री कार: 16-कोच वाले वर्जन के विपरीत, 24-कोच वाली इस ट्रेन में एक पूरी पैंट्री कार होगी, जिससे लंबी यात्रा के दौरान ट्रेन के अंदर ही गर्म खाना तैयार कर परोसा जा सकेगा।
अधिक बर्थ और टॉयलेट क्षमता: इस लंबे रैक में कुल 1,400 से अधिक बर्थ (एसी 3-टियर, एसी 2-टियर और फर्स्ट एसी कोच को मिलाकर) मिलने की उम्मीद है, साथ ही यात्रियों की संख्या के हिसाब से विमान जैसे आधुनिक बायो-वैक्यूम टॉयलेट्स भी बढ़ाए जाएंगे। कोच की संख्या का पता डिज़ाइन सामने आने के बाद पता लगेगा ।
आधुनिक सुरक्षा और आराम: हर ट्रेनसेट में स्वदेशी 'कवच' (KAVACH) एंटी-कोलिजन सिस्टम, रीजेनरेटिव ब्रेकिंग, बेहतर कुशन वाली आरामदायक बर्थ, ऑटोमेटिक इंटरकनेक्टिंग दरवाजे, सील्ड गैंगवे और फर्स्ट एसी में गर्म पानी के शॉवर की सुविधा मिलेगी।
कहां बन रहे हैं 24-कोच वंदे भारत के मेंटेनेंस शेड?
गुजरात के साबरमती (अहमदाबाद) में पश्चिम रेलवे 24-कोच वाली वंदे भारत ट्रेनों के शेड्यूल्ड ओवरहॉल के लिए ₹307 करोड़ की लागत से एक बड़ा मेंटेनेंस हब तैयार कर रहा है। इसका 322 मीटर लंबा हैवी रिपेयर शेड लगभग बनकर तैयार है, जिसमें दो मेंटेनेंस लाइनें (पूरे कोच को लिफ्ट करने के लिए सिंक्रोनाइज़्ड पिट जैक और इंटीरियर/इलेक्ट्रिकल रिपेयर सुविधा के साथ) हैं। इसके अलावा यहां सीएनसी मशीनों वाला व्हील केयर शेड, ट्रैक्शन मोटर व ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत के लिए अलग सेक्शन शेड और 4 स्टेबलिंग लाइनें (2,547 मीटर ट्रैक) बनाई गई हैं। यह हब 24-कोच रैक का SS-I मेंटेनेंस 30 दिनों में (सालाना 12 रैक) और SS-II ओवरहॉल 45 दिनों में (सालाना 8 रैक) पूरा करेगा।
वहीं, देश का पहला डेडिकेटेड वंदे भारत स्लीपर के लिए मेंटेनेंस डिपो राजस्थान के जोधपुर (भगत की कोठी) में ₹360 करोड़ की लागत से बन रहा है। 24-कोच के पूरे स्लीपर रैक को खड़ा करने के लिए इसमें 600 मीटर लंबा मेंटेनेंस ट्रैक, तीन पिट लाइनें, ड्रॉप पिट टेबल और ₹55 करोड़ का सिम्युलेटर ट्रेनिंग सेंटर शामिल है, जहां रोज़ाना 8 से 9 ट्रेनों की सर्विसिंग हो सकेगी। इसके साथ ही बिजवासन (दिल्ली), आनंद विहार (दिल्ली), थानिसंद्रा (बेंगलुरु) और वाडी बंदर (मुंबई) में भी चार और स्लीपर मेंटेनेंस डिपो बनाए जा रहे हैं।
Kinet व Titagarh–BHEL अपडेट:
ICF के 24-कोच प्रोजेक्ट के साथ-साथ, लातूर में 120 स्लीपर रैक (16-कोच) बना रही भारत-रूस जॉइंट वेंचर कंपनी Kinet Railway Solutions अब मार्च 2027 तक अपना पहला प्रोटोटाइप लाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। वहीं 80 स्लीपर रैक (प्रोटोटाइप लक्ष्य: Q3 FY27) बना रहे Titagarh–BHEL कंसोर्टियम ने इन ट्रेनों के 35 साल के रखरखाव के लिए हाल ही में दिल्ली में एक नया 50:50 जॉइंट वेंचर बनाया है। कुल मिलाकर, नवंबर 2026 में 24-कोच का डिज़ाइन फाइनल होने और साबरमती व जोधपुर जैसे 600-मीटर क्षमता वाले डिपो तैयार होने के साथ, भारतीय रेलवे लंबी दूरी की रात्रिकालीन यात्रा को पूरी तरह बदलने जा रहा है।
इस विषय पर विडियो यहां देखिए -