भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन (BEML B28) का अनावरण: बेंगलुरु के 'आदित्य' प्लांट की झलक, 280 किमी/घंटा की रफ़्तार और अगस्त 2027 लॉन्च की पूरी जानकारी
भारत की पहली 'मेड-इन-इंडिया' बुलेट ट्रेन - B28 हाई-स्पीड ट्रेनसेट का बेंगलुरु स्थित BEML के समर्पित 'आदित्य' प्लांट में आधिकारिक तौर पर एक-एक हिस्से के रूप में अनावरण कर दिया गया है। इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), चेन्नई की देखरेख में नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) द्वारा दो ट्रेनसेट के लिए लगभग 864 करोड़ रुपये की शुरुआती लागत पर इसका ऑर्डर दिया गया था। स्टेनलेस-स्टील से बनी यह बुलेट ट्रेन वर्तमान में पूर्ण कोच एकीकरण (full coach integration), 173 करोड़ रुपये के क्लाइमेटिक चैंबर टेस्ट और सूरत से बिलिमोरा के बीच अगस्त 2027 के लक्षित लॉन्च से पहले एक महत्वपूर्ण 'स्क्वीज़ टेस्ट' (दबाव परीक्षण) से गुजर रही है।
स्वदेशी B28 बुलेट ट्रेन की पहली विस्तृत झलक के साथ भारत की हाई-स्पीड रेल यात्रा ने आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। ट्रेन के प्रत्येक प्रमुख हिस्से का निर्माण बेंगलुरु कॉम्प्लेक्स में BEML के नवनिर्मित 'आदित्य हाई-स्पीड रेल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी' (Aditya High-Speed Rail Manufacturing Facility) में एक-एक करके किया जा रहा है, जिसे विशेष रूप से इसी बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए स्थापित किया गया है।
आठ कोच वाले दो प्रोटोटाइप ट्रेनसेट का शुरुआती ऑर्डर नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) द्वारा लगभग 866 करोड़ रुपये की लागत पर दिया गया था। जहाँ प्रोपल्शन और कंट्रोल सिस्टम के लिए मेधा सर्वो ड्राइव्स (Medha Servo Drives) की साझेदारी में BEML इसके निर्माण का नेतृत्व कर रहा है, वहीं इस पूरे प्रोजेक्ट की देखरेख इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), चेन्नई द्वारा की जा रही है।
वर्ल्ड-क्लास फिनिशिंग वाली स्टेनलेस स्टील बॉडी और स्क्वीज़ टेस्टिंग
फैक्ट्री के भीतर ट्रेनसेट का बारीकी से निरीक्षण करने पर इसकी बेहतरीन निर्माण गुणवत्ता (build quality) साफ़ नज़र आती है। भले ही प्रत्येक कोच का ढांचा उच्च-मजबूती वाले स्टेनलेस स्टील (SUS301L-ST) का उपयोग करके बनाया गया है, फिर भी BEML ने हवा के प्रतिरोध (air drag) को कम करने और सुरंगों के भीतर बनने वाले दबाव की तरंगों (tunnel pressure waves) को झेलने के लिए डिज़ाइन किए गए एयरोडायनामिक नोज़ कोन के साथ एक बेहद स्मूद और विश्वस्तरीय बाहरी फिनिश हासिल की है।
इस समय, असेंबल किया गया कारबॉडी स्ट्रक्चर 1,500 किलोन्यूटन (kN) के भार के तहत एक महत्वपूर्ण स्क्वीज़ टेस्ट से गुजर रहा है, ताकि तेज़ रफ़्तार के दौरान वायुमंडलीय दबाव में होने वाले बदलावों के खिलाफ इसकी संरचनात्मक मजबूती को परखा जा सके। अगले एक से दो सप्ताह में इस स्क्वीज़ टेस्ट को पास करने के बाद, पूर्ण कोच एकीकरण (full coach integration) शुरू हो जाएगा। इस चरण के दौरान इंजीनियर निम्नलिखित उपकरण और सुविधाएं स्थापित करेंगे:
▪ चौड़े व्यू वाली अकूस्टिक (ध्वनि-रोधी) खिड़कियां और सील्ड गैंगवे (कोचों के बीच के रास्ते)
▪ ऑनबोर्ड इलेक्ट्रिकल वायरिंग और ट्रैक्शन उपकरण
▪ ध्वनि-रोधी (sound-insulated) फ्लोरिंग और इंटीरियर वॉल पैनल
▪ मॉड्यूलर प्रेशराइज्ड बायो-डाइजेस्टर शौचालय और छत पर लगने वाली दोहरी एयर-कंडीशनिंग यूनिट्स
विश्वस्तरीय घूमने वाली सीटें (Rotating Chairs) और आधुनिक इंटीरियर
202 मीटर लंबे और आठ कोच वाले प्रत्येक ट्रेनसेट (चार मोटर कार और चार ट्रेलर कार) में सात स्टैंडर्ड क्लास कोच (3x2 लेआउट) और एक एग्जीक्यूटिव क्लास कोच (2x2 लेआउट) मिलाकर लगभग 557 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी।
यात्रियों की सीटें आराम और फिनिशिंग दोनों मामलों में विश्वस्तरीय हैं, जिन्हें विशेष रूप से भारतीय शारीरिक मापदंडों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है। एग्जीक्यूटिव क्लास की सीटों में 180-डिग्री घूमने (rotation) और पीछे की ओर गहराई तक झुकने (deep recline) की सुविधा है। इसके अलावा, सभी कोचों में ऑनबोर्ड वाई-फाई इंफोटेनमेंट, बहुभाषी LCD स्क्रीन, हर पंक्ति में चार्जिंग सॉकेट और दिव्यांगजन यात्रियों की सुविधा के लिए रिट्रैक्टेबल फुटस्टेप्स के साथ व्हीलचेयर-अनुकूल लेवल बोर्डिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
173 करोड़ रुपये का क्लाइमेटिक चैंबर टेस्ट और रोलआउट टाइमलाइन
सेवा में शामिल होने से पहले, इन कोचों को ICF चेन्नई द्वारा 173 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए विशेष क्लाइमेटिक टेस्ट चैंबर के भीतर अत्यधिक कठोर मौसम परीक्षणों से भी गुजरना होगा। यह प्रयोगशाला अत्यधिक तापमान (-10°C से 55°C), भारी मानसूनी बारिश, उच्च आर्द्रता (नमी) और धूल भरी परिस्थितियों में ट्रेन का परीक्षण करेगी।
280 किमी/घंटा की अधिकतम डिज़ाइन स्पीड और 250 किमी/घंटा की परिचालन गति (महज़ 52 सेकंड में 0 से 100 किमी/घंटा की रफ़्तार पकड़ने में सक्षम) के लिए तैयार की गई B28 बुलेट ट्रेन चरणबद्ध कार्यक्रम का पालन करेगी:
मार्च 2027 (Q1 2027): BEML के बेंगलुरु प्लांट से पहले B28 प्रोटोटाइप ट्रेनसेट का आगमन और रोलआउट।
वसंत 2027 (Spring 2027): क्लाइमेटिक सत्यापन और चरणबद्ध परीक्षण के लिए ट्रेनसेट को सूरत रोलिंग स्टॉक डिपो में भेजना।
मई–जून 2027: हाई-स्पीड कॉरिडोर पर पूर्ण-स्तरीय ट्रैक और स्पीड ट्रायल।
अगस्त 2027: सूरत से बिलिमोरा के प्राथमिकता वाले सेक्शन (priority section) पर लक्षित लॉन्च।
यहाँ ट्रेन B28 का पूरा विस्तृत वीडियो दिया गया है।