दिल्ली से गुवाहाटी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर मंजूर: कानपुर-अयोध्या से निकलेगा रास्ता, देखें स्टेशनों की पूरी लिस्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली से गुवाहाटी उत्तरी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को स्वीकृति दे दी है। जानें कानपुर, अयोध्या, वाराणसी, पटना और सिलीगुड़ी का रूट व समय।

दिल्ली से गुवाहाटी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को पीएम मोदी की स्वीकृति:

भारत में तीव्र गति की रेल सेवा का सपना अब एक नए ऐतिहासिक चरण में प्रवेश कर चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे बड़े उत्तरी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को अपनी आधिकारिक स्वीकृति दे दी है। यह विशाल हाई-स्पीड रेल नेटवर्क देश की राजधानी दिल्ली को उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से होते हुए सीधे असम के गुवाहाटी तक जोड़ेगा।

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 31 अक्टूबर 2026 को वाराणसी से नई दिल्ली के बीच चलने वाली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस के शुभारंभ अवसर पर इस बड़ी परियोजना की घोषणा की। इस कॉरिडोर के बनने के बाद दिल्ली से गुवाहाटी की जो रेल यात्रा अभी 30 से 35 घंटे में पूरी होती है, वह घटकर 8 घंटे से भी कम समय में पूरी हो जाएगी।

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 31 अक्टूबर 2026 को वाराणसी से नई दिल्ली के बीच चलने वाली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस के शुभारंभ अवसर पर इस बड़ी परियोजना की घोषणा की। इस कॉरिडोर के बनने के बाद दिल्ली से गुवाहाटी की जो रेल यात्रा अभी 30 से 35 घंटे में पूरी होती है, वह घटकर 8 घंटे से भी कम समय में पूरी हो जाएगी।

संक्षिप्त सारांश: मुख्य बिंदु एक दृष्टि में

परियोजना को स्वीकृति: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली से गुवाहाटी उत्तरी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को हरी झंडी दी।

प्रमुख शहर जुड़े: दिल्ली, जेवर एयरपोर्ट, आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, प्रयागराज, वाराणसी, पटना, सिलीगुड़ी और गुवाहाटी।

उत्तर प्रदेश को दोहरा लाभ: औद्योगिक नगरी कानपुर और प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या को इस कॉरिडोर में सम्मिलित किया गया।

कुल दूरी में विस्तार: पहले दिल्ली से सिलीगुड़ी तक की लंबाई 1,557 किलोमीटर थी, जो अब गुवाहाटी जुड़ने के बाद बढ़कर लगभग 1,900 किलोमीटर से अधिक हो जाएगी।

गति और सुविधा: बुलेट ट्रेन अधिकतम 350 किलोमीटर प्रति घंटे की गति क्षमता (320 किमी/घंटा की परिचालन गति) से दौड़ेगी, प्रत्येक 1 घंटे के अंतराल पर उपलब्ध होगी और इसका टिकट मूल्य विमान की तुलना में काफी कम रहेगा।

दिल्ली और जेवर एयरपोर्ट से सीधी सुविधा: आगरा से प्रारंभ होने का भ्रम दूर

दिल्ली और जेवर एयरपोर्ट की बुलेट ट्रेन से कनेक्टिविटी
दिल्ली और जेवर एयरपोर्ट की बुलेट ट्रेन से कनेक्टिविटी/AI Photo

प्रारंभिक चर्चाओं में कई लोगों को यह भ्रम था कि क्या यह बुलेट ट्रेन आगरा से चलेगी। आधिकारिक योजना के अनुसार, यह कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां स्टेशन से ही प्रारंभ होगा और नोएडा तथा जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को जोड़ते हुए मथुरा और आगरा पहुंचेगा।

इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि देश या विदेश से जेवर एयरपोर्ट पर उतरने वाले यात्री एयरपोर्ट परिसर से ही सीधे बुलेट ट्रेन पकड़कर आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, प्रयागराज या वाराणसी जा सकेंगे। दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट मात्र 21 मिनट में और दिल्ली से आगरा केवल 59 मिनट में पहुंचा जा सकेगा।

कानपुर का नाम पक्का, परंतु इटावा और कन्नौज के मार्ग पर क्या है स्थिति?

उत्तरी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर दिल्ली से गुवाहाटी रूट मैप और स्टेशन - Delhi to Guwahati Northern Bullet Train Corridor Route Map in Hindi
उत्तरी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर दिल्ली से गुवाहाटी रूट मैप और स्टेशन - Delhi to Guwahati Northern Bullet Train Corridor Route Map in Hindi

18 सितंबर 2026 को जब इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) रेल मंत्रालय को सौंपे जाने का समाचार आया था, तब सबसे बड़ा प्रश्न यही था कि कन्नौज और कानपुर में से किसे स्थान मिलेगा। पुराने प्रस्तावित मार्ग में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के किनारे इटावा और दक्षिण कन्नौज में स्टेशन प्रस्तावित थे और कानपुर शहर छूट रहा था।

अब रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट कर दिया है कि कानपुर में बुलेट ट्रेन का प्रमुख स्टेशन बनाया जाएगा, जिससे दिल्ली से कानपुर की यात्रा मात्र 1 घंटा 45 मिनट (पौने दो घंटे) में पूरी हो सकेगी। कानपुर उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक केंद्र है और यहाँ प्रसिद्ध आईआईटी कानपुर भी स्थित है, इसलिए आम नागरिकों, विद्यार्थियों और व्यापारियों के लिए कानपुर का जुड़ना अत्यंत आवश्यक था। कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी के प्रस्ताव पर रेल मंत्रालय ने कानपुर को मुख्य मार्ग से जोड़ने की सहमति दे दी है।

यद्यपि राष्ट्रीय हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने अभी तक संशोधित डीपीआर का पूरा दस्तावेज और मानचित्र सार्वजनिक नहीं किया है, इसलिए आगरा और कानपुर के बीच के मार्ग को लेकर एक तकनीकी प्रश्न अभी भी बना हुआ है। पूर्व की रिपोर्ट्स में बताया गया था कि इटावा से कन्नौज और फिर कानपुर की ओर पटरी मोड़ने पर तीखा घुमाव आता, जिससे 350 किलोमीटर प्रति घंटे की गति बाधित होती। ताजा समाचारों के अनुसार अब इटावा के प्रस्तावित ठहराव के स्थान पर आगरा से सीधे कानपुर तक ट्रैक लाने या कन्नौज-कानपुर सीमा के अरौल के पास से ले जाने की चर्चा है। आगरा के बाद यह मार्ग इटावा और औरैया होते हुए कानपुर जा रहा है या कन्नौज होते हुए, यह अंतिम मानचित्र सार्वजनिक होने पर पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगा।

अयोध्या का ऐतिहासिक प्रवेश: आध्यात्मिक और आर्थिक केंद्रों का संगम

इस उत्तरी कॉरिडोर की दूसरी सबसे बड़ी विशेषता अयोध्या का जुड़ना है। पुरानी योजना में लखनऊ के बाद यह रेल मार्ग रायबरेली और प्रयागराज होते हुए सीधे वाराणसी जाता था और अयोध्या मुख्य मार्ग में सम्मिलित नहीं था।

वर्तमान में अयोध्या पूरे भारत का एक प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र बन चुका है, जिसे देखते हुए अब लखनऊ के बाद अयोध्या को भी इस बुलेट ट्रेन नेटवर्क से जोड़ दिया गया है। अयोध्या के पश्चात प्रयागराज होते हुए यह ट्रेन काशी विश्वनाथ की नगरी वाराणसी पहुंचेगी। इस प्रकार मथुरा, आगरा, अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी एक ही हाई-स्पीड सूत्र में बंध जाएंगे।

वाराणसी से पटना और बिहार के 8 जिलों का मार्ग

वाराणसी से आगे बढ़ने पर बिहार के भीतर का मार्ग पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार ही रखा गया है। बुलेट ट्रेन से वाराणसी से पटना की दूरी मात्र 1 घंटे में पूरी होगी, जबकि दिल्ली से पटना की यात्रा 12–14 घंटे से घटकर केवल 4 घंटे 41 मिनट रह जाएगी।

बिहार में यह कॉरिडोर 8 जिलों—बक्सर, भोजपुर (आरा), पटना, बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार, पूर्णिया और किशनगंज—से होकर निकलेगा। राज्य में बक्सर, पटना (एम्स फुलवारीशरीफ के पास संभावित), बेगूसराय, खगड़िया और कटिहार में 5 प्रमुख स्टेशन बनाए जाने की चर्चा है, जिसके बाद यह ट्रेन पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी पहुंचेगी।

सिलीगुड़ी से गुवाहाटी तक विस्तार की पूरी कहानी

केंद्रीय बजट 2026–27 और सितंबर 2026 की डीपीआर तक यह कॉरिडोर दिल्ली से वाराणसी (लगभग 865 किमी) और वाराणसी से सिलीगुड़ी (लगभग 692 किमी) को मिलाकर कुल 1,557 किलोमीटर लंबा था और सिलीगुड़ी पर समाप्त हो रहा था।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा

जुलाई 2026 में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा और दिल्ली में भेंट कर अनुरोध किया कि इस हाई-स्पीड रेल मार्ग को सिलीगुड़ी से आगे बढ़ाकर पूर्वोत्तर के प्रवेश द्वार गुवाहाटी तक लाया जाए। पूर्वोत्तर भारत में बढ़ते उद्योगों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिलीगुड़ी से गुवाहाटी तक के विस्तार को स्वीकृति दे दी है। सिलीगुड़ी से गुवाहाटी का लगभग 350 से 400 किलोमीटर का नया खंड जुड़ने से अब इस पूरे कॉरिडोर की कुल लंबाई बढ़कर लगभग 1,900 किलोमीटर से अधिक हो जाएगी।

निर्माण के तीन चरण: सबसे पहले कौन-सा भाग बनेगा?

दिल्ली से गुवाहाटी तक का यह पूरा नेटवर्क तीन चरणों में निर्मित किया जाने की संभावना है:

प्रथम चरण (दिल्ली से वाराणसी – ~865 किमी): बजट 2026–27 में घोषित सात नए कॉरिडोर में दिल्ली–वाराणसी खंड सबसे आगे है और प्रथम प्राथमिकता पर है। इसके अंतर्गत सबसे पहले दिल्ली से आगरा खंड पर निर्माण कार्य प्रारंभ होगा, उसके बाद आगरा–कानपुर–लखनऊ और फिर लखनऊ–अयोध्या–प्रयागराज–वाराणसी खंड बनेगा।

द्वितीय चरण (वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी – ~692 किमी): इस खंड की डीपीआर सितंबर 2026 में रेल मंत्रालय को सौंपी जा चुकी है और अब इसके सर्वेक्षण व भूमि संबंधी कार्यों की तैयारी चल रही है।

तृतीय चरण (सिलीगुड़ी से गुवाहाटी विस्तार – ~350–400 किमी): अक्टूबर 2026 में स्वीकृत इस नए विस्तार के लिए अब विस्तृत सर्वेक्षण और डीपीआर की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

दिल्ली से वाराणसी पटना और गुवाहाटी बुलेट ट्रेन समय सारणी - Northern Bullet Train Official Travel Time Chart in Hindi
दिल्ली से वाराणसी पटना और गुवाहाटी बुलेट ट्रेन समय सारणी - Northern Bullet Train Official Travel Time Chart in Hindi

विस्तृत यूट्यूब वीडियो विश्लेषण देखें -

youtube