RCF कपूरथला की पहली वंदे भारत चेयर कार को रेलवे बोर्ड की हरी झंडी: Alstom ट्रैक्शन ने पास किया टेस्ट, जानें क्या हैं शर्तें और आगे का मेगा प्लान
भारतीय रेलवे में वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की बढ़ती मांग को देखते हुए अब निर्माण की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ ICF चेन्नई तक सीमित नहीं रही है। ICF पर स्लीपर और अन्य प्रोजेक्ट्स का भारी वर्कलोड होने के कारण चेयर कार वंदे भारत के उत्पादन में RCF कपूरथला और MCF रायबरेली को बड़ी भूमिका दी गई है। इसी कड़ी में एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है—RCF कपूरथला द्वारा बनाई गई पहली 16-कोच वंदे भारत चेयर कार ट्रेन को 23 अक्टूबर 2026 को रेलवे बोर्ड से ऑपरेशनल रन की मंज़ूरी (Conditional Approval) मिल गई है।
मार्च 2022 में दिए गए शुरुआती ऑर्डर के तहत RCF कपूरथला को 16 वंदे भारत ट्रेनें बनाने का काम सौंपा गया था, जिनके ट्रैक्शन और प्रोपल्शन कंपोनेंट Alstom सप्लाई कर रहा है (वहीं MCF रायबरेली को Siemens प्रोपल्शन के साथ 9 ट्रेनों का ऑर्डर मिला था)।
अप्रैल 2026 में RCF का पहला 16-कोच प्रोटोटाइप बनकर बाहर आया। इसके बाद मथुरा–नागदा (कोटा–नागदा) सेक्शन पर 160 और 180 kmph की रफ़्तार पर इसके हाई-स्पीड ट्रायल किए गए। 21 जुलाई 2026 को RDSO के फ़ाइनल स्पीड सर्टिफ़िकेट (No. MC/TSBD/BT) और अक्टूबर 2026 में CCRS ट्रायल में सफल रहने के बाद यह साबित हो गया कि RCF और Alstom का यह नया ट्रेनसेट पूरी तरह कामयाब है।
कितनी स्पीड पर दौड़ेगी यह नई ट्रेन?
रेलवे बोर्ड ने इस 16-कोच ट्रेनसेट को 160 kmph तक की अधिकतम ऑपरेशनल स्पीड पर चलाने की अनुमति दी है। हालांकि, रेल नेटवर्क पर मौजूदा स्पीड और ट्रैक सुरक्षा नियमों के चलते फ़िलहाल यह ट्रेन नियमित सेवा में 130 kmph तक की रफ़्तार पर ही चलाई जाएगी।
रेलवे बोर्ड ने किन कमियों को सुधारने का निर्देश दिया?
23 अक्टूबर 2026 के अपने आधिकारिक पत्र में रेलवे बोर्ड ने ट्रेन को हरी झंडी देते हुए कुछ तकनीकी और सुरक्षा सुधार तुरंत करने को कहा है:
1. Single-Pole की जगह Double-Pole MCB और लेबलिंग: इलेक्ट्रिकल कंट्रोल कैबिनेट (ECC) में सिंगल-पोल MCB लगाए गए हैं और उन पर स्पष्ट लेबलिंग नहीं है, जिससे किसी खराबी के समय फ़ॉल्ट ढूंढने में दिक्कत आ सकती है। बोर्ड ने इस रैक और भविष्य के सभी रैक्स में प्रॉपर लेबलिंग के साथ Double-Pole MCB लगाने का आदेश दिया है।
2. DDU टचस्क्रीन की सेंसिटिविटी में सुधार: लोको पायलट के केबिन में लगी Driver Display Unit (DDU) की टचस्क्रीन का रिस्पॉन्स धीमा पाया गया है, जिसे तुरंत ठीक करने को कहा गया है।
3. 270 kW ट्रैक्शन मोटर रेटिंग की समीक्षा: Alstom वाले इस रैक में ट्रैक्शन मोटर की क्षमता 270 kW है, जबकि Medha (ICF) में यह 210 kW और Siemens (MCF) में 225 kW है। रेलवे बोर्ड ने RDSO और RCF से इस अंतर का तकनीकी औचित्य (Technical Justification) जांचने को कहा है।
4.फ़ायर सेफ़्टी और इमरजेंसी तैयारी: कोच में फ़ायर एक्सटिंग्विशर के ढीले एक्रिलिक दरवाज़ों को मज़बूती से लॉक करने, भविष्य के रैक्स में CCTV के लिए फ़ायर-सर्वाइवल केबल्स व क्रैश-हार्डन्ड मेमोरी लगाने, और आपातकाल में 15 मिनट के भीतर कपलर अलग करने के लिए ड्राइवर/गार्ड किट में ज़रूरी टूल्स रखने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या अब ऑर्डर और बड़ा हो गया है? (2026–2030 मेगा प्लान)
बिल्कुल! पुरानी शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों को चरणबद्ध तरीके से बदलने के लिए रेलवे बोर्ड ने 2 जनवरी 2026 के आदेश के तहत 2026-27 से 2029-30 के बीच 1,500 नए वंदे भारत चेयर कार कोचेस (कुल 88 ट्रेनें) बनाने का बड़ा लक्ष्य रखा है:
RCF कपूरथला: 336 कोचेस बनाएगा, जिनसे 16-कोच वाली कुल 21 ट्रेनें तैयार होंगी (शुरुआती 16 रैक के बैच सहित)।
MCF रायबरेली: 444 कोचेस बनाएगा, जिनसे 16-कोच वाली लगभग 27 से 28 ट्रेनें तैयार होंगी।
ICF चेन्नई: 720 कोचेस बनाएगा, जिनसे कुल 40 ट्रेनें तैयार होंगी (20 रैक 20-कोच के और 20 रैक 16-कोच के)।
साफ़ है कि RCF कपूरथला और Alstom के पहले रैक को रेलवे बोर्ड की मंज़ूरी मिलना भारतीय रेलवे के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। मामूली तकनीकी सुधारों के बाद अब कपूरथला फ़ैक्ट्री में वंदे भारत चेयर कार ट्रेनों का तेज़ी से सीरीज़ प्रोडक्शन शुरू हो सकेगा।
इस पूरे अपडेट, टेक्निकल कमियों के समाधान और वंदे भारत प्रोडक्शन के ग्राउंड डिटेल्स को और गहराई से समझने के लिए नीचे दी गई हमारी एक्सक्लूसिव YouTube वीडियो ज़रूर देखें: